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Showing posts from November, 2024

America`s war of indepsndence

  ● अमेरिका में ब्रिटिश औपनिवेशिक साम्राज्य की नीव 'जेम्स प्रथम के शासनकाल में डाली गयी। अमेरिकी स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान इंगलैंड का शासक 'जॉर्ज तृतीय; था। ● रेड इंडियन अमेरिका के मूल निवासी थे। ● अमेरिका का स्वतंत्रता - युद्ध 1783 ई. में पेरिस की संधि के तहत समाप्त हुआ। इस संधि के अनुसार ब्रिटेन ने उत्तरी अमेरिका के 13 अंग्रेजी उपनिवेशों की स्वतंत्रता स्वीकार कर ली। ● अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में 'लफायते' के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना ने इंग्लैड के विरुद्ध भाग लिया था। ● सप्तवर्षीय युद्ध में इंग्लैण्ड की काफी आर्थिक क्षति हुई थी। इस क्षतिपूर्ति हेतु तत्कालीन प्रधानमंत्री 'ग्रेनविले' ने 1765 ई. में स्टाम्प एक्ट पारित किया जिसके अनुसार सभी अदालती कागजों, अखबारों आदि पर 20 शिलिंग का स्टाम्प लगना अनिवार्य था। 1767 में ब्रिटिश संसद ने कागज, शीशा, चाय एवं रोगन जैसे उपभोक्ता वस्तुओं पर भी कर लगाया। उपनिवेशवासियों ने इन करों का व्यापक विरोध पर भी कर लगाया। उपनिवेशवासियों ने इन करों का व्यापक विरोध दिया तथा 'सैमुअल एडम्स ने प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं' ...

Swatantra prantiya state

                      स्वतंत्र प्रान्तीय राज्य जिस वक्त दिल्ली सल्तनत के सुल्तान देश के अधिकांश भाग पर शासन कर रहे थे उस समय भी कई स्वतंत्र राज्य देश के विभिन्न हिस्सों में विद्यमान थे। दिल्ली सल्तनत के कमजोर होने से कई दूसरे राज्य भी अस्तित्व में आ गए। जौनपुर जौनपुर की स्थापनाफिरोजशाह तुगलक ने अपने भाई जौना खा की स्मृति में की थी. जौनपुर में स्वतंत्र शर्की राजवंश की स्थापना मलिक सरवर ख्वाजा जहान ने की थी. ख्वाजा जहान को मलिक-उस-शर्क पूर्व का स्वामी की उपाधि 1394 ई में फिरोजशाह तुगलक के पुत्र सुल्तान महमूद ने दी थी. जौनपुर के अन्य प्रमुख शासक थे – मुबारकशाह (1399-1402 ई) शम्सुद्दीन इब्राहिमशाह (1402-1436 ई) महमूदशाह (1436 – 1451 ई) और हुसैनशाह (1458 – 1500 ई) लगभग 75 वर्ष तक स्वतंत्र रहने के बाद जौनपुर पर बहलोल लोदी ने कब्जा कर लिया. शर्की शासन के अंतर्गत, विशेषकर इब्राहिमशाह के समय में, जौनपुर में साहित्य और स्थापत्यकला के क्षेत्र में हुए विकास के कारण जौनपुर को भारत के सीरज के नाम से जाना गया. अटालादेवी की मस्जिद का निर्माण 1408 ई...

Mohammad gauri hindi

                             मोहम्मद ग़ोरी मुहम्मद गौरी का पूरा नाम मुइनुददीन मुहम्मद बिन साम गौरे था मोहम्मद गौरी ने 1176 ई मे गजनी का सिंघासन सम्हाला मोहम्मद गौरी ने भारत पर तुर्क राज्य की स्थापना की इसका पहला आक्रमण 1175 में मुल्तान पर हुआ शंसबानी वंश के मोहम्मद गौरी का भारत पर प्रथम आक्रमण 1175 ईस्वी में मुल्तान पर हुआ था गोमल दर्रे से होकर डेरा इस्माइल खाँ होते हुए सिंध पहुंचने का मार्ग उस समय का सबसे प्रचलित मार्ग था मोहम्मद गोरी ने इसी मार्ग से सिंध पर आक्रमण किया मोहम्मद गौरी से पहले के आक्रमण भी इसी मार्ग से हुए थे मोहम्मद गोरी के आक्रमण के समय मुल्तान पर करमाथियों का शासन था मोहम्मद गोरी ने सरलता से उन्हें पराजित कर मुल्तान जीत लिया मुल्तान पर अधिकार करने के बाद उसने उच्च और निचले सिंध को भी जीता था मोहम्मद गौरी का भारत पर दूसरा आक्रमण दूसरा आक्रमण पाटन (गुजरात) में हुआ इसने 1176 ई में ऊच्छ पर आक्रमण करके भट्टी राजपूतों का राज्य छीन लिया तराईन का युद्ध तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई०) मुहम्मद गोरी ने 1186...